उत्तर भारत में अप्रैल 2026 का मौसम लोगों को हैरान कर रहा है। आमतौर पर जहां इस महीने तेज गर्मी पड़ती है, वहीं इस बार ठंड और नमी का माहौल बना हुआ है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, राजस्थान और उत्तराखंड में दिन का तापमान सामान्य से 8 से 15 डिग्री तक नीचे चला गया है। दिल्ली में जहां पारा 35 डिग्री के आसपास रहता है, वहां यह करीब 21 डिग्री तक गिर गया है। लगातार बारिश, गरज-चमक, ओलावृष्टि और ठंडी हवाओं ने मौसम को पूरी तरह बदल दिया है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, मार्च और अप्रैल की शुरुआत में एक के बाद एक कई वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय हुए हैं। खासकर 7 और 8 अप्रैल को इनका असर ज्यादा देखने को मिला। उत्तर पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के ऊपर बने सिस्टम के कारण उत्तर भारत के कई राज्यों में भारी बारिश, ओले और 40 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। मौसम विभाग ने 9 से 11 अप्रैल के बीच एक और नए सिस्टम के सक्रिय होने की चेतावनी दी है।
क्या होता है वेस्टर्न डिस्टर्बेंस?
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस भूमध्य सागर से उत्पन्न होने वाले मौसमी सिस्टम होते हैं, जो ऊपरी हवाओं के साथ भारत की ओर बढ़ते हैं। आमतौर पर ये सर्दियों में ज्यादा सक्रिय रहते हैं, लेकिन अब इनकी संख्या मार्च-अप्रैल में भी बढ़ती जा रही है, जिससे मौसम में असामान्य बदलाव देखने को मिल रहा है।
अरब सागर की नमी से बढ़ा असर
इस बार इन सिस्टम्स को अरब सागर से आने वाली नमी ने और ज्यादा ताकतवर बना दिया है। राजस्थान के ऊपर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन ने इस नमी को खींचा, जिससे बादल घने हुए, बारिश और ओलावृष्टि तेज हुई और तापमान में तेजी से गिरावट आई।
जलवायु परिवर्तन का संकेत?
वैज्ञानिकों के अनुसार आर्कटिक क्षेत्र के तेजी से गर्म होने के कारण जेट स्ट्रीम का पैटर्न बदल रहा है। इससे वेस्टर्न डिस्टर्बेंस अब ज्यादा लहरदार होकर भारत के निचले हिस्सों तक पहुंच रहे हैं और वसंत ऋतु में भी सक्रिय हो रहे हैं। रिसर्च बताती है कि इनकी बढ़ती संख्या जलवायु परिवर्तन का संकेत हो सकती है।
फसलों और मौसम पर असर
इस असामान्य मौसम का असर रबी फसलों पर भी पड़ रहा है। कई इलाकों में बारिश और ओलों से नुकसान हुआ है, जबकि पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी भी दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार 10 अप्रैल तक यह स्थिति बनी रह सकती है, इसके बाद धीरे-धीरे गर्मी लौटने की संभावना है।
असामान्य मौसम ने बढ़ाई चिंता
अप्रैल में फरवरी जैसा मौसम सामान्य नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो भविष्य में खेती, जल संसाधन और मौसम के पैटर्न पर गंभीर असर पड़ सकता है।
