काशी में गूंजा सनातन विज्ञान का डंका, वैदिक घड़ी ने बदला समय का पूरा गणित

काशी में गूंजा सनातन विज्ञान का डंका, वैदिक घड़ी ने बदला समय का पूरा गणित

धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी ने एक बार फिर दुनिया को अपनी प्राचीन वैज्ञानिक ताकत का अहसास कराया है। काशी विश्वनाथ धाम में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी अब आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी है। रविवार को ब्रह्म मुहूर्त से इस घड़ी ने समय बताना शुरू किया, जिससे पूरे देश में उत्साह का माहौल है। यह सिर्फ एक घड़ी नहीं बल्कि भारत की हजारों साल पुरानी ज्ञान परंपरा का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है।

सूर्योदय के साथ खुद को ढालती है घड़ी
इस घड़ी की सबसे खास बात यह है कि यह किसी तय समय पर नहीं, बल्कि सूर्योदय के अनुसार खुद को संचालित करती है। काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विश्व भूषण मिश्र के मुताबिक, यह घड़ी आधुनिक समय के साथ-साथ वैदिक समय का भी सटीक तालमेल दिखाती है। यही वजह है कि इसे दुनिया की सबसे अनोखी घड़ी कहा जा रहा है।

एक घड़ी में पूरा ब्रह्मांड का हिसाब
यह वैदिक घड़ी केवल घंटे और मिनट नहीं बताती, बल्कि इसमें विक्रम संवत, मास, पंचांग, ग्रहों की स्थिति, चंद्रमा की चाल, भद्रा और शुभ-अशुभ मुहूर्त जैसी कई महत्वपूर्ण जानकारियां एक साथ मिलती हैं। इस तरह यह घड़ी एक संपूर्ण वैदिक डेटाबेस की तरह काम करती है। इससे लोगों को हर दिन के शुभ समय और धार्मिक गणना की पूरी जानकारी आसानी से मिल सकेगी।

24 नहीं, 30 मुहूर्त का होता है दिन
वैदिक गणना के अनुसार इस घड़ी में समय की परिभाषा पूरी तरह अलग है। यहां एक दिन 24 घंटे का नहीं बल्कि 30 मुहूर्त का माना जाता है, जिसमें एक मुहूर्त करीब 48 मिनट का होता है। एक दिन में 900 कला और 27,000 काष्ठा होती हैं। यह गणना आधुनिक समय प्रणाली से बिल्कुल अलग लेकिन बेहद सटीक मानी जाती है।

नई पीढ़ी के लिए डिजिटल कनेक्शन
इस प्राचीन ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप’ भी लॉन्च किया गया है। यह ऐप 180 से ज्यादा भाषाओं में उपलब्ध है और इसमें 5800 सालों का पंचांग मौजूद है। इसके जरिए लोग शुभ-अशुभ समय की जानकारी अलार्म के रूप में पा सकते हैं, साथ ही मौसम से जुड़ी सटीक जानकारी भी मिलती है।

भारत की वैज्ञानिक विरासत का नया संदेश
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी के अनुसार, यह घड़ी युवा पीढ़ी को भारतीय वैज्ञानिक सोच और समय गणना की महान परंपरा से जोड़ने का माध्यम बनेगी। काशी से शुरू हुआ यह संदेश अब पूरी दुनिया तक पहुंचेगा कि भारत का प्राचीन विज्ञान आज भी उतना ही सटीक और प्रासंगिक है।

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