हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना एक सुंदर और सुख-समृद्धि से भरा घर हो। इसके लिए लोग वर्षों तक मेहनत करते हैं और अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा घर बनाने में लगाते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार केवल घर बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि जिस जमीन पर घर बनाया जा रहा है, वह शुभ और रहने योग्य हो।
वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि घर निर्माण से पहले जमीन की प्रकृति, आकार और आसपास के वातावरण का सावधानीपूर्वक आकलन करना चाहिए। यदि भूमि में वास्तु दोष हो तो इसका प्रभाव घर में रहने वाले लोगों के जीवन पर भी पड़ सकता है।
अधम भूमि पर घर बनवाने से बचें
वास्तु शास्त्र में कुछ प्रकार की जमीन को अशुभ माना गया है। ऐसी ही एक भूमि को ‘अधम भूमि’ कहा जाता है। इसकी पहचान करने के लिए एक पारंपरिक तरीका बताया गया है। इसके अनुसार जमीन के उत्तर दिशा वाले हिस्से में लगभग एक से डेढ़ फुट गहरा गड्ढा खोदकर उसकी मिट्टी निकाल ली जाती है। इसके बाद उसी मिट्टी को वापस गड्ढे में भरा जाता है। यदि मिट्टी भरने के बाद कुछ हिस्सा बच जाए तो भूमि अत्यंत शुभ मानी जाती है। यदि मिट्टी बराबर मात्रा में भर जाए तो भूमि सामान्य मानी जाती है। वहीं अगर मिट्टी कम पड़ जाए और गड्ढा पूरी तरह न भर सके तो ऐसी भूमि को अशुभ माना जाता है।
सिंहमुखी भूमि को नहीं माना जाता शुभ
वास्तु में भूखंड के आकार का भी विशेष महत्व बताया गया है। जो जमीन सामने की ओर चौड़ी और पीछे की ओर संकरी होती है, उसे सिंहमुखी भूमि कहा जाता है। मान्यता है कि इस प्रकार की जमीन पर बने घर में रहने वालों को मानसिक तनाव, अस्थिरता और कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि आवास निर्माण के लिए सिंहमुखी भूखंड को ज्यादा उपयुक्त नहीं माना जाता।
श्मशान और खंडहर के पास घर बनाने से बचें
वास्तु शास्त्र के अनुसार श्मशान घाट, वीरान स्थान या किसी पुराने खंडहर के आसपास घर बनाना भी उचित नहीं माना जाता। माना जाता है कि ऐसे स्थानों पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक हो सकता है। ऐसी जगहों पर रहने वाले लोगों को मानसिक तनाव, आर्थिक कठिनाइयों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए घर के लिए जमीन चुनते समय आसपास के वातावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है।
गौमुखी भूमि को माना गया सबसे शुभ
वास्तु शास्त्र में जिस भूखंड को घर बनाने के लिए सबसे अच्छा माना गया है, उसे गौमुखी भूमि कहा जाता है। इस प्रकार की जमीन आगे से संकरी और पीछे से चौड़ी होती है। मान्यता है कि गौमुखी भूमि पर बने घर में सुख, शांति, समृद्धि और स्थिरता का वास होता है। ऐसे घरों में रहने वाले लोगों को जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और उन्नति प्राप्त होती है। इसलिए यदि नया घर बनाने की योजना बना रहे हैं तो भूमि के चयन में इन वास्तु नियमों पर भी ध्यान देना लाभदायक हो सकता है।
