उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के शिवनाम गांव में स्थित सोमेश्वर महादेव मंदिर श्रद्धालुओं के बीच खास आस्था का केंद्र माना जाता है। इस मंदिर को जोगनी धाम या जोगनी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर बहुत प्राचीन है और इसकी मान्यताएं सदियों पुरानी हैं। यहां स्थापित शिवलिंग को लेकर कई रहस्यमयी कथाएं भी सुनने को मिलती हैं, जिसके कारण दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
महाभारत काल से जुड़ी बताई जाती है कहानी
ग्रामीणों और बुजुर्गों का कहना है कि इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है। मान्यता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के समय इस इलाके में कुछ समय रुके थे। उसी दौरान आसपास कई शिव मंदिरों की स्थापना की गई थी और सोमेश्वर महादेव मंदिर को भी उसी समय का बताया जाता है। कहा जाता है कि इस क्षेत्र में योगिनियों का वास रहा, इसलिए इसे जोगनी धाम कहा जाने लगा।
आधी रात की पूजा को लेकर रहस्य
इस मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यता यह है कि रात में मंदिर बंद होने के बाद भी यहां पूजा होती है। स्थानीय लोगों का दावा है कि आधी रात के समय कोई अदृश्य शक्ति शिवलिंग की पूजा करती है। सुबह जब मंदिर के पुजारी कपाट खोलते हैं तो शिवलिंग पर ताजे बेलपत्र, जल और चावल चढ़े हुए मिलते हैं। कई बार इस रहस्य को समझने की कोशिश की गई, लेकिन आज तक यह पता नहीं चल सका कि मंदिर बंद होने के बाद पूजा कौन करता है।
भक्तों की आस्था का प्रमुख स्थान
सोमेश्वर महादेव मंदिर में केवल बाराबंकी ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्तों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से दर्शन करने पर मनोकामनाएं पूरी होती हैं और कई परेशानियों से राहत मिलती है। गांव के लोग बताते हैं कि यह मंदिर उनके पूर्वजों के समय से मौजूद है और पीढ़ियों से यहां पूजा होती आ रही है। इसी वजह से यह स्थान आज भी आस्था और रहस्य दोनों का केंद्र बना हुआ है।
