ईरान-अमेरिका की बैठक पर पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद का बड़ा बयान,बोले- ‘जिसको शांति से मतलब नहीं, वो…’

ईरान-अमेरिका की बैठक पर पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद का बड़ा बयान,बोले- ‘जिसको शांति से मतलब नहीं, वो…’

लखनऊ में कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने विदेश नीति, SIR प्रक्रिया और संविधान पर BJP सरकार को घेरा

लखनऊ में पूर्व विदेश मंत्री और कांग्रेस के सीनियर नेता सलमान खुर्शीद (Salman Khurshid) ने अमेरिका-ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिस देश को शांति से कोई सरोकार नहीं, वही आज विश्व शांति का दूत बनने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी माना कि इस मामले में भारत अपनी भूमिका निभाने में पीछे रह गया।

सलमान खुर्शीद ने कहा कि पाकिस्तान में यह बातचीत इसलिए हो रही है क्योंकि भारत ने नेतृत्व नहीं किया। उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक साख और क्षमता के हिसाब से अगर सरकार ने सही विदेश नीति अपनाई होती, तो आज यह भूमिका भारत निभा रहा होता। उनके मुताबिक, कूटनीतिक चूक के कारण पाकिस्तान को यह अवसर मिला।

मतदाता सूची पर दी सलाह

उन्होंने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का नाम मतदाता सूची से कट गया है, उनके पास अभी समय है और उन्हें जल्द से जल्द अपना नाम जुड़वाना चाहिए। यह लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी प्रक्रिया है, जिसमें हर नागरिक को भागीदारी करनी चाहिए।

‘संविधान की रक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी’

खुर्शीद ने अधिवक्ता सम्मेलन में कहा कि आज वकील संविधान की रक्षा की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है, ताकि संवैधानिक मूल्यों को सुरक्षित रखा जा सके और हर व्यक्ति को न्याय मिल सके।

अजय राय ने कानून व्यवस्था पर साधा निशाना

इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष अजय राय (Ajay Rai) ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने मिर्जापुर में एक वकील की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में अपराध बढ़ रहा है और सरकार अपराधियों को संरक्षण दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि समय पर सख्त कार्रवाई न होने से ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं।

कांग्रेस अधिवक्ता सम्मेलन में जुटे बड़े नेता

लखनऊ के गांधी भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इसमें मुख्य रूप से राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी (Abhishek Manu Singhvi), अविनाश पांडेय और अन्य पदाधिकारी व बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। यह सम्मेलन ज्योतिबा फुले की जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था।

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