भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। बढ़ते वैश्विक तनाव, खासकर वेस्ट एशिया संकट के बीच RBI ने महंगाई और आर्थिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया। केंद्रीय बैंक ने इस बार भी अपना रुख ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है।
महंगाई को लेकर बढ़ी चिंता
RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान 4.6% रखा है, जबकि कोर महंगाई 4.4% रहने का अनुमान है। तिमाही आधार पर भी महंगाई में बढ़ोतरी के संकेत दिए गए हैं—दूसरी तिमाही के लिए अनुमान 4.4% और तीसरी तिमाही के लिए 5.2% तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। फरवरी में खुदरा महंगाई बढ़कर 3.21% पर पहुंच गई, जो पिछले 11 महीनों में सबसे ज्यादा है।
GDP ग्रोथ में गिरावट के संकेत
केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.9% कर दिया है, जो पिछले वर्ष के 7.4% से कम है। पहली तिमाही के लिए ग्रोथ 6.8% और दूसरी तिमाही के लिए 6.9% रहने का अनुमान है। इससे साफ है कि आर्थिक विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा की चेतावनी
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि अल नीनो जैसी मौसमीय परिस्थितियां और वैश्विक तनाव महंगाई को बढ़ा सकते हैं। खासकर ऊर्जा कीमतों में हालिया उछाल एक बड़ा जोखिम बनकर उभरा है। हालांकि फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ है।
वैश्विक हालात का असर
वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। थोक महंगाई भी 2.13% तक पहुंच चुकी है, जो एक साल से अधिक समय में उच्च स्तर है। RBI ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में महंगाई और ग्रोथ दोनों ही दबाव में रह सकते हैं।
