अगर आपने कभी रेलवे स्टेशन पर गौर किया हो तो वहां खाने-पीने की दुकानें, बुक स्टॉल और दूसरी सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं। लेकिन मेडिकल स्टोर बहुत कम दिखाई देते हैं। दरअसल, पहले रेलवे स्टेशन पर अलग से केमिस्ट स्टॉल यानी मेडिकल दुकानें खोली जाती थीं। रेलवे बोर्ड ने इसके लिए जगह तय कर रखी थी और कई स्टेशनों पर दवा की दुकानें भी मौजूद थीं।
नियम बदलने के बाद आया बदलाव
समय के साथ रेलवे ने अपनी नीति में बदलाव किया। प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग तरह की कई दुकानों के कारण भीड़ बढ़ने लगी और यात्रियों के लिए जगह कम पड़ने लगी। इसी वजह से रेलवे ने अलग मेडिकल स्टॉल देने की व्यवस्था को धीरे-धीरे खत्म कर दिया और उसकी जगह मल्टी पर्पज स्टॉल की व्यवस्था शुरू कर दी।
अब क्या मिलता है इन स्टॉल्स पर?
आज अधिकांश स्टेशनों पर मल्टी पर्पज स्टॉल यानी एमपीएस संचालित किए जाते हैं। इन दुकानों पर किताबें, खाने-पीने का सामान और जरूरत की कई दूसरी चीजें मिलती हैं। साथ ही बिना डॉक्टर की पर्ची वाली सामान्य दवाइयां भी यहां उपलब्ध कराई जा सकती हैं। यानी अब अलग मेडिकल स्टोर की बजाय एक ही दुकान पर कई सुविधाएं देने का मॉडल अपनाया गया है।
कितने स्टेशनों पर हैं मेडिकल स्टोर?
रेलवे की जानकारी के अनुसार देश में बहुत कम स्टेशनों पर अलग से मेडिकल स्टोर काम कर रहे हैं। ऐसे स्टेशनों की संख्या करीब 21 बताई जाती है। वहीं दूसरी तरफ सरकार कई प्रमुख स्टेशनों पर जन औषधि केंद्र और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है।
इमरजेंसी में क्या करें?
अगर यात्रा के दौरान अचानक तबीयत खराब हो जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। रेलवे के पास प्राथमिक उपचार की व्यवस्था रहती है। टीटीई, स्टेशन मास्टर और अन्य कर्मचारियों को फर्स्ट एड की ट्रेनिंग दी जाती है। कई ट्रेनों और स्टेशनों पर मेडिकल बॉक्स उपलब्ध होते हैं। इसके अलावा नजदीकी अस्पतालों और डॉक्टरों की सूची भी रेलवे के पास रहती है, जिससे जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मिल सके।
यात्रियों की सुविधा पर फोकस
रेलवे का कहना है कि प्लेटफॉर्म पर जगह बचाने और यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए मल्टी पर्पज स्टॉल की व्यवस्था लागू की गई है। यही कारण है कि आज रेलवे स्टेशनों पर अलग मेडिकल स्टोर कम दिखाई देते हैं, लेकिन जरूरत की सामान्य दवाएं और आपातकालीन चिकित्सा सहायता अब भी उपलब्ध कराई जाती है।
