देश में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा कर दिया गया है। मंगलवार को तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम करीब 90 पैसे प्रति लीटर बढ़ा दिए। नई कीमतें तुरंत प्रभाव से लागू भी कर दी गई हैं। खास बात यह है कि बीते पांच दिनों में यह दूसरी बार है, जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है और अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या साल 2022 की तरह फिर से लगातार पेट्रोल-डीजल महंगा होने वाला है।
दिल्ली-मुंबई में पेट्रोल 100 के करीब
तेल कंपनियों ने 15 मई को करीब चार साल बाद पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद 19 मई को एक बार फिर 90 पैसे प्रति लीटर का इजाफा कर दिया गया। नई कीमतों के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 98.64 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं मुंबई में पेट्रोल 107.59 रुपये और डीजल 94.08 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। लगातार बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है।
IOCL ने कहा- उपभोक्ताओं को बचाने की कोशिश
सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि कंपनी कीमतों में बढ़ोतरी धीरे-धीरे कर रही है, ताकि महंगाई पर ज्यादा असर न पड़े और उपभोक्ताओं पर अचानक बोझ न बढ़े। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल यह तय नहीं किया गया है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कुल कितनी बढ़ोतरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि वैश्विक हालात लगातार बदल रहे हैं और उसी के हिसाब से आगे फैसला लिया जाएगा। IOCL अधिकारी ने कहा कि कंपनी तिमाही मुनाफे से ज्यादा उपभोक्ताओं को राहत देने पर ध्यान दे रही है। उन्होंने माना कि मिडिल ईस्ट संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण दाम बढ़ाना जरूरी हो गया था।
मिडिल ईस्ट संकट बना बड़ी वजह
तेल कंपनियों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट संकट है। इस क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा मार्ग है। यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ता है। इसी वजह से भारत सहित कई देशों में ईंधन महंगा हो रहा है।
क्या फिर दोहराया जाएगा 2022 वाला दौर?
साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान तेल कंपनियों ने लगातार 13 दिनों तक पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए थे। उस समय करीब 15 दिनों में ईंधन 10 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो गया था। अब दोबारा बढ़ती कीमतों के बीच लोगों के मन में वही डर पैदा हो रहा है। हालांकि IOCL अधिकारियों ने कहा है कि फिलहाल 2022 जैसी स्थिति से तुलना करना सही नहीं होगा। कंपनी का कहना है कि कीमतों को धीरे-धीरे एडजस्ट किया जा रहा है ताकि महंगाई को नियंत्रण में रखा जा सके।
महंगाई बढ़ने का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से खाने-पीने की चीजों समेत रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। आर्थिक एजेंसी बार्कलेज के मुताबिक, शुरुआती 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से जून महीने में खुदरा महंगाई दर (CPI) में करीब 15 बेसिस पॉइंट तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं मई में इसका असर करीब 8 बेसिस पॉइंट तक देखने को मिल सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और बढ़ती हैं या नहीं, इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।
