पहलगाम आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मामले में एक अहम खुलासा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, हमले में शामिल आतंकियों के पास से बरामद दो मोबाइल फोन पाकिस्तान के जरिए आतंकियों तक पहुंचे थे। ये फोन 28 जुलाई को हुए एक एनकाउंटर के दौरान बरामद किए गए थे। इनमें एक Redmi 9T (ऑरेंज) और दूसरा Redmi Note 12 (ब्लैक) मॉडल का फोन शामिल था।
फोरेंसिक जांच के दौरान दोनों मोबाइलों से महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई, जिससे आतंकियों के नेटवर्क और हमले की तैयारी से जुड़े कई नए तथ्य सामने आए हैं। NIA का दावा है कि इन मोबाइलों की सप्लाई चेन पाकिस्तान से जुड़ी हुई है और इन्हें सुनियोजित तरीके से आतंकियों तक पहुंचाया गया था।
पाकिस्तान की कंपनियों के जरिए हुई थी डिलीवरी
जांच में सामने आया कि Redmi 9T मोबाइल जनवरी 2021 में पाकिस्तान पहुंचा था। NIA ने इसके IMEI नंबर के आधार पर Xiaomi Global से संपर्क कर इसकी सप्लाई हिस्ट्री हासिल की। रिकॉर्ड के मुताबिक यह फोन एक बड़े कंसाइनमेंट का हिस्सा था, जिसे पाकिस्तान की कराची स्थित कंपनी Tech Sirat Pvt Ltd ने इम्पोर्ट किया था।
कराची के बैंक ने किया था कंसाइनमेंट की फंडिंग
जांच एजेंसी के अनुसार, इस कंसाइनमेंट की फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट कराची के Faysal Bank ने किया था। रिकॉर्ड में डिलीवरी एड्रेस भी बैंक के हेड ऑफिस का दर्ज मिला। हालांकि बैंक पर पहले भी कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में आतंकवाद से जुड़े संगठनों के खातों को लेकर सवाल उठ चुके हैं, लेकिन बैंक ने हमेशा ऐसे आरोपों से इनकार किया है। NIA का कहना है कि मोबाइल की डिलीवरी के लगभग चार साल बाद, यानी 2025 में यह फोन सक्रिय हुआ और बाद में पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों के पास मिला। जांचकर्ताओं का मानना है कि फोन को शुरू से ही किसी विशेष उद्देश्य के लिए सुरक्षित रखकर रखा गया था।
Redmi Note 12 के मामले में भी मिला समान पैटर्न
दूसरे मोबाइल Redmi Note 12 की जांच में भी इसी तरह का पैटर्न सामने आया। NIA के मुताबिक यह फोन 2023 में पाकिस्तान की लाहौर स्थित Air Link Communications Limited द्वारा इम्पोर्ट किया गया था। यह कंपनी पाकिस्तान की प्रमुख मोबाइल डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों में गिनी जाती है। जांच में पता चला कि यह फोन भी लंबे समय तक निष्क्रिय रखा गया और पहलगाम हमले से कुछ समय पहले ही सक्रिय किया गया। इससे एजेंसी को शक है कि दोनों डिवाइस आतंकियों को विशेष मिशन के लिए उपलब्ध कराए गए थे।
बैसरन घाटी की लोकेशन पहले से थी सेव
फोरेंसिक विश्लेषण के दौरान मोबाइल में मौजूद नेविगेशन एप AlpineQuest से महत्वपूर्ण जानकारी मिली। जांच में पाया गया कि बैसरन घाटी की लोकेशन पहले से सेव थी। इसके अलावा 15 और 16 अप्रैल को बैसरन क्षेत्र के कई स्क्रीनशॉट भी लिए गए थे। गौरतलब है कि पहलगाम का आतंकी हमला 22 अप्रैल को हुआ था। ऐसे में एजेंसी का मानना है कि आतंकियों ने हमले की तैयारी कई दिन पहले से शुरू कर दी थी और इलाके की रेकी भी की गई थी।
मोबाइल डेटा नहीं मिला, रेडियो कम्युनिकेशन का इस्तेमाल
NIA की जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। दोनों मोबाइलों से न तो कोई कॉल रिकॉर्ड मिला, न मैसेज, न सोशल मीडिया चैट और न ही इंटरनेट आधारित कम्युनिकेशन का कोई सबूत मिला। जांचकर्ताओं का मानना है कि आतंकियों ने मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की बजाय लंबी दूरी की रेडियो कम्युनिकेशन तकनीक का इस्तेमाल किया। यह तकनीक कई किलोमीटर दूर तक सुरक्षित संचार की सुविधा देती है और सामान्य निगरानी प्रणालियों से बच निकलने में मदद करती है। इसी वजह से मोबाइलों में संचार संबंधी कोई डेटा मौजूद नहीं था।
GoPro कैमरे की जांच से भी मिले अहम सुराग
इससे पहले NIA ने खुलासा किया था कि पहलगाम हमले से जुड़े आतंकियों के पास अमेरिकी कंपनी GoPro का हाई-टेक कैमरा भी मिला था। यह कैमरा दाचीगाम के जंगलों में हुई मुठभेड़ के बाद बरामद किया गया था। जांच में पता चला कि कैमरा चीन के रास्ते आतंकियों तक पहुंचा था। NIA ने GoPro Inc. से संपर्क कर इसकी सप्लाई चेन की जानकारी हासिल की। अब एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चीन से यह उपकरण किन नेटवर्कों और बिचौलियों के जरिए आतंकियों तक पहुंचा। अधिकारियों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठन अब हमलों की रिकॉर्डिंग और प्रचार के लिए बॉडी कैमरा तथा एक्शन कैमरा जैसे आधुनिक उपकरणों का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।
चार्जशीट में पाकिस्तान कनेक्शन का दावा
NIA द्वारा दिसंबर 2025 में दाखिल चार्जशीट में भी पहलगाम हमले के पीछे पाकिस्तान आधारित नेटवर्क की भूमिका का दावा किया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार, हमले का मास्टरमाइंड लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी सैफुल्लाह उर्फ सैफुल्लाह साजिद जट्ट था, जो पाकिस्तान के लाहौर के पास कसूर क्षेत्र में रहता है। चार्जशीट के मुताबिक, हमले के दौरान वह आतंकियों के लगातार संपर्क में था और उन्हें रियल टाइम निर्देश दे रहा था। एजेंसी का दावा है कि बैसरन घाटी की लोकेशन भी उसी ने आतंकियों को भेजी थी। NIA अब मोबाइल, कैमरा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की सप्लाई चेन की जांच के जरिए पूरे आतंकी नेटवर्क और उसके सहयोगियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
