Operation Mahadev: सावन के तीसरे सोमवार पर खुला ‘तीसरा नेत्र’, Hashim Musa समेत तीन आतंकियों का सफाया

Operation Mahadev: सावन के तीसरे सोमवार पर खुला ‘तीसरा नेत्र’, Hashim Musa समेत तीन आतंकियों का सफाया

ऑपरेशन महादेव के तहत सावन के तीसरे सोमवार पर सेना ने अपने तीसरे खोल दिए। कम्युनिकेशन डिवाइस की मदद से हाशिम मूसा समेत तीन गुनहगारों को ढेर कर दिया। ये भारत की दृढ़ता दिखाता है, लेकिन आतंक का नेटवर्क अभी भी जिंदा है। सेना को सतर्क रहना होगा ताकि कश्मीर में शांति बनी रहे।

सावन के तीसरे सोमवार को जब पूरा देश भगवान शिव की पूजा में लीन था, तब भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर महादेव के तीसरे नेत्र की तरह प्रहार किया। ऑपरेशन महादेव के तहत श्रीनगर के लिडवास इलाके में सेना ने तीन खूंखार आतंकियों को मार गिराया। इनमें पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड हाशिम मूसा भी शामिल था।

28 जुलाई को सावन का तीसरा सोमवार था, जो भगवान शिव की आराधना का विशेष दिन होता है। मान्यता है कि जब शिवजी का तीसरा नेत्र खुलता है तो बुराई का अंत होता है। इसी प्रतीकात्मकता को ध्यान में रखते हुए इस ऑपरेशन को ‘महादेव’ नाम दिया गया।

ऑपरेशन की शुरुआत कैसे हुई?
पिछले दो हफ्ते से 24 RR, 4 पैरा, जम्मू-कश्मीर पुलिस (JKP) और CRPF की टीमें दाचीगाम क्षेत्र में आतंकियों की तलाश में थीं। 26 जुलाई को एक कम्युनिकेशन डिवाइस फिर से एक्टिव हुई, जिसके बाद सुबह 11:30 बजे लिडवास और दाचीगाम जंगलों में ऑपरेशन तेज हुआ।

मुठभेड़: एक संयोगवश मुठभेड़ हुई। 4 पैरा की टीम ने जंगल में आतंकियों के टेंट को देखा, जहां वे सो रहे थे। सेना ने चुपके से हमला कर दिया। 6 घंटे की गोलीबारी के बाद तीनों को मार गिराया गया।

सांस्कृतिक संदेशः इस दिन ऑपरेशन का होना संयोग नहीं, बल्कि आतंक के खिलाफ दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।

कौन थे मारे गए आतंकी?

हाशिम मूसा उर्फ अबू सुलैमान: पहलगाम और सोनमर्ग हमलों का मास्टरमाइंड, लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा था। उसने अपनी वेशभूषा बदलने के लिए वजन कम किया था लेकिन सेना उसे पहचान लिया।

यासिर और हामजा (संभावित): दोनों लश्कर से जुड़े आतंकी बताए जा रहे हैं, पहचान की पुष्टि बाकी है।

आतंकियों के पास से क्या-क्या बरामद हुआ?

सेना को आतंकियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद मिला।

AK-47 राइफल, M4 कार्बाइन, हैंड ग्रेनेड, IED (घरेलू विस्फोटक) और सैटेलाइट फोन अभी तक कोई नया कम्युनिकेशन डिवाइस नहीं मिला।

पहलगाम हमला: वो काला दिन
22 अप्रैल 2025 को बाइसरन घाटी में TRF आतंकियों ने 26 पर्यटकों को गोलियों से भून दिया था। हमले में 25 भारतीय और 1 नेपाली नागरिक मारे गए थे। आतंकियों ने पहले पर्यटकों का धर्म पूछा और फिर बर्बरता की सारी हदें पार कीं।

सेना का जवाब और संदेश
हमले के बाद 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर में पीओके स्थित आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक हुई थी। लेकिन आतंकियों की जड़ें खत्म करने के लिए सेना ने 96 दिन तक चले एक बड़े अभियान की योजना बनाई, जिसे ऑपरेशन महादेव नाम दिया गया।

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