Lucknow Durga Pandal: उत्तर प्रदेश की राजधानी एक बार फिर “मिनी कोलकाता” के रूप में जगमगा रही है। पंडाल का सबसे बड़ा आकर्षण थर्माकोल से निर्मित ब्रह्मोस मिसाइल का भव्य मॉडल है, जो भारतीय सेना की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की ताकत को दर्शाता है। इसके बगल में सेल्फी पॉइंट बनाया गया है।
लखनऊ के जानकीपुरम सेक्टर ई के दुर्गा पार्क में इस बार का दुर्गा पूजा पंडाल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे विशाल पंडाल माना जा रहा है।
2 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में फैला यह पंडाल 105 फीट ऊंचा, 100 फीट लंबा और 115 फीट चौड़ा है। यानी करीब 10 मंजिला इमारत जितना विशाल। आयोजकों का दावा है कि यह गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज होगा और लखनऊ की पूजा परंपरा को नई पहचान देगा।
ईको-फ्रेंडली डिजाइन पर थीम आधारित पंडाल
इस वर्ष का पंडाल 105 फीट ऊंचा, 100 फीट लंबा और 115 फीट चौड़ा है, जो एक 10 मंजिला इमारत जितना विशाल है। उत्सव पूजा समिति के चेयरमैन सौरभ बंदोपाध्याय के अनुसार, पंडाल का बाहरी हिस्सा पैगोडा शैली में सजा है, जो पूर्वी एशिया की प्राचीन वास्तुकला की याद दिलाता है। अंदरूनी सज्जा लॉस एंजेलिस के स्वामीनारायण मंदिर की भव्यता से प्रेरित है, जहां संगमरमर जैसी सफेद चमक और जटिल नक्काशीदार दीवारें श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देंगी। मुख्य गर्भगृह को अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर डिजाइन किया गया है, जहां 18 फीट ऊंची इको-फ्रेंडली मां दुर्गा की प्रतिमा विराजमान होगी। यह प्रतिमा बांस, प्राकृतिक रंगों और पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से बनी है, जो प्लास्टिक या थर्माकोल से पूरी तरह मुक्त है।
ब्रह्मोस मिसाइल का मॉडल, राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक
इस पंडाल का सबसे बड़ा आकर्षण है थर्माकोल से बनी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का भव्य मॉडल। इसके बगल में सेल्फी प्वॉइंट बनाया गया है, जहां श्रद्धालु फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर शेयर कर सकेंगे। आयोजकों का कहना है कि यह थीम आस्था और राष्ट्रीय गौरव का संगम है।
ब्रह्मोस मिसाइल मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के 11 प्रमुख एयरबेस को ध्वस्त कर चुकी है। अब यह पंडाल में मां दुर्गा के चरणों में स्थापित होकर बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक बन गई है।
पंडाल में स्पेशल किड्स जोन
पंडाल को एयरोडायनामिक सिद्धांतों पर बनाया गया है, ताकि तेज आंधी या भारी बारिश में भी यह डटकर खड़ा रहे। पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए, हमने बैक-एयर कंट्रोल सिस्टम लगाया है। “पंडाल के 10,000 वर्ग फुट मुख्य क्षेत्र के अलावा 65,000 वर्ग फीट का किड्स जोन है, जहां झूले, गेम्स और इंटरएक्टिव एक्टिविटीज होंगी। 1 लाख वर्ग फुट का ओपन स्पेस मेले के लिए आरक्षित है, जहां फूड स्टॉल्स पर बंगाली व्यंजनों से लेकर लोकल स्ट्रीट फूड तक सब कुछ उपलब्ध होगा। कुल मिलाकर, यह पंडाल हर उम्र के लिए एक महोत्सव का केंद्र बनेगा, जहां आस्था और देशभक्ति का अनोखा मेल होगा।
पैगोडा शैली से लेकर राम मंदिर की झलक
पंडाल का बाहरी हिस्सा पैगोडा शैली में सजाया गया है, जो पूर्वी एशिया की प्राचीन वास्तुकला की याद दिलाता है। अंदर का डिजाइन लॉस एंजेलिस के स्वामीनारायण मंदिर से प्रेरित है, जिसमें संगमरमर जैसी सफेद चमक और नक्काशीदार दीवारें हैं।
मुख्य गर्भगृह को अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर सजाया गया है, जहां 18 फीट ऊंची इको-फ्रेंडली मां दुर्गा की प्रतिमा विराजमान होगी। खास बात यह है कि प्रतिमा पूरी तरह बांस, मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी है।
ऑपरेशन सिंदूर की याद दिलाता ब्रह्मोस मॉडल
पंडाल में ब्रह्मोस मॉडल का महत्व तब और बढ़ जाता है, जब हम ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को याद करते हैं। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जो पाकिस्तान समर्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक हमलों का प्रतीक था। भारतीय वायुसेना ने सुखोई-30 एमकेआई विमानों से ब्रह्मोस मिसाइलें दागीं, जिन्होंने पाकिस्तान के 11 प्रमुख एयरबेस जैसे नूर खान, रफीकी, मुरिद, सूक्कुर, सियालकोट आदि को निशाना बनाया।
लगभग 15 ब्रह्मोस मिसाइलों ने पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त कर दिया, जिसमें चीनी HQ-9 सिस्टम भी शामिल था। यह पहला मौका था जब ब्रह्मोस को जंग में उतारा गया। दुर्गा पूजा के संदर्भ में ब्रह्मोस का मॉडल मां दुर्गा के असुर-वध का प्रतीक बन गया है। जहां मिसाइल बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देती है। आयोजक इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा और आध्यात्मिक शक्ति का संगम’ बता रहे हैं।
बंगाल के कारीगरों की मेहनत, 40 लाख की लागत
इस विशाल पंडाल को तैयार करने के लिए 3 जुलाई 2025 को नींव रखी गई थी। पश्चिम बंगाल के मिदनापुर से आए 54 कारीगर लगातार काम कर रहे हैं। 15,000 बांस असम से मंगवाए गए, 4,300 वर्ग मीटर कपड़ा सूरत से आया और 5 क्विंटल कीलें इस्तेमाल हुईं।
करीब 40 लाख रुपये की लागत से बना यह पंडाल पूरी तरह भूकंप-रोधी और मौसम-सहिष्णु है। ब्रह्मोस मॉडल को LED लाइट्स से खास तौर पर हाइलाइट किया गया है।
लखनऊ उत्सव पूजा समिति का यह 31वां आयोजन है। इसकी शुरुआत 1995 में एक छोटे से पंडाल से हुई थी। तब दुर्गा पूजा मुख्य रूप से बंगाली समुदाय तक सीमित थी।
आज 250 से अधिक समितियां सक्रिय हैं और यह आयोजन राजधानी का सबसे बड़ा सामुदायिक त्योहार बन चुका है। इस बार का पंडाल आस्था, संस्कृति और देशभक्ति के अनोखे मेल का गवाह है।
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