देश के कई हिस्सों में इन दिनों रसोई गैस को लेकर लोगों की परेशानी बढ़ती दिखाई दे रही है। कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें लग रही हैं और लोगों को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा। कुछ जगहों पर लोगों ने विरोध भी किया और सड़क पर प्रदर्शन की खबरें सामने आईं। अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण समुद्री रास्तों पर असर पड़ा है, जिसका असर गैस की आपूर्ति पर भी दिखाई दे रहा है।
विदेशों पर निर्भर है भारत की गैस आपूर्ति
भारत अपनी जरूरत की पूरी गैस खुद तैयार नहीं करता। देश में करीब 40 प्रतिशत गैस का उत्पादन होता है जबकि बाकी लगभग 60 प्रतिशत गैस विदेशों से मंगाई जाती है। रसोई गैस के लिए भारत लंबे समय से पश्चिम एशिया के देशों पर निर्भर रहा है। कतर, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे देशों से बड़ी मात्रा में गैस भारत आती है।
समुद्री रास्ते से होती है गैस की सप्लाई
भारत तक आने वाली ज्यादातर गैस समुद्र के रास्ते से पहुंचती है। विशेषज्ञों के अनुसार विदेशों से आने वाली लगभग 90 प्रतिशत गैस समुद्री मार्ग से होकर ही भारत तक आती है। यह गैस समुद्र में मौजूद एक महत्वपूर्ण रास्ते से गुजरती है और फिर अरब सागर के रास्ते भारत के बंदरगाहों तक पहुंचती है। अगर इस रास्ते पर किसी तरह की रुकावट आती है तो सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
तरल रूप में जहाजों से लाई जाती है गैस
रसोई में इस्तेमाल होने वाली गैस को उसी रूप में जहाजों से नहीं लाया जाता। गैस को पहले विशेष प्रक्रिया से तरल रूप में बदला जाता है ताकि उसे कम जगह में ज्यादा मात्रा में ले जाया जा सके। इस प्रक्रिया में गैस को दबाव और कम तापमान में रखा जाता है, जिससे वह तरल रूप ले लेती है और उसे सुरक्षित तरीके से जहाजों में भरा जा सकता है।
भारत के बंदरगाहों तक ऐसे पहुंचती है गैस
विदेशों से चलकर गैस से भरे जहाज भारत के कई बड़े बंदरगाहों तक पहुंचते हैं। इसके बाद गैस को बड़े टैंकों में जमा किया जाता है। यहां से पाइपलाइन और टैंकर के जरिए इसे अलग-अलग जगहों तक भेजा जाता है। बॉटलिंग प्लांट में गैस को सिलेंडरों में भरकर फिर गैस एजेंसियों के माध्यम से लोगों के घरों तक पहुंचाया जाता है।
सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए जाते हैं
गैस के परिवहन के दौरान सुरक्षा का खास ध्यान रखा जाता है। जहाजों में गैस भरने से पहले टैंकों में विशेष गैस भरी जाती है ताकि किसी तरह का खतरा न हो। साथ ही जहाजों में ऐसे उपकरण लगाए जाते हैं जो तापमान और दबाव को संतुलित बनाए रखते हैं। इसी वजह से इतनी बड़ी मात्रा में गैस समुद्र के रास्ते सुरक्षित तरीके से एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाई जा सकती है।
