कानपुर में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। यह नेटवर्क सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका कनेक्शन विदेशों तक फैला हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि विदेशी मरीज भी चोरी-छिपे भारत आकर इस गैंग के जरिए किडनी ट्रांसप्लांट कराते थे।
तस्करों ने दिल्ली, मुंबई, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में अस्पतालों और डॉक्टरों का एक पूरा नेटवर्क बना रखा था। डोनर और रिसीवर की डील तय होने के बाद अलग-अलग शहरों में अवैध तरीके से ट्रांसप्लांट किए जाते थे। इस पूरे ऑपरेशन को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया जाता था।
फ्लाइट से आते थे डॉक्टर, घंटों में ऑपरेशन
हर काम के लिए अलग टीम बनाई गई थी। डॉक्टरों की टीम फ्लाइट से पहुंचती, कुछ ही घंटों में सर्जरी पूरी करती और वापस लौट जाती। किस अस्पताल में ऑपरेशन होगा, कौन डॉक्टर करेगा और डोनर-रिसीवर कौन हैं यह सारी जानकारी पूरी तरह सीक्रेट रखी जाती थी।
टेक्नीशियनों ने खोले राज
डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक, अब तक 8 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। हाल ही में पकड़े गए दो ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार ने पूछताछ में कई अहम खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि नोएडा के डॉक्टर रोहित उन्हें हर केस में भेजता था और इसके लिए उन्हें 35 से 50 हजार रुपए तक मिलते थे।
साउथ अफ्रीका की महिला का भी हुआ ट्रांसप्लांट
जांच में सामने आया है कि इस गैंग ने साउथ अफ्रीका की एक महिला अरेबिका का भी ट्रांसप्लांट किया था। यह रैकेट कानपुर के अलावा दिल्ली, मेरठ, नोएडा, हरियाणा और पश्चिम बंगाल तक सक्रिय था। हर राज्य में डॉक्टरों और अस्पतालों का अलग पैनल तैयार किया गया था।
विदेशियों से वसूले जाते थे करोड़ों
पुलिस के अनुसार, भारत में ट्रांसप्लांट के लिए 60 लाख से 1 करोड़ रुपए तक लिए जाते थे, जबकि विदेशी मरीजों से 2 से 2.5 करोड़ रुपए तक वसूले जाते थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने सैकड़ों ट्रांसप्लांट किए हैं और इसमें 50 से ज्यादा लोग शामिल हो सकते हैं।
फरार डॉक्टरों की तलाश में छापेमारी
इस मामले में नोएडा के डॉक्टर रोहित समेत मेरठ के डॉक्टर अफजल, वैभव और अनुराग फरार हैं। पुलिस की टीमें कानपुर, मेरठ, लखनऊ, दिल्ली और गाजियाबाद में लगातार छापेमारी कर रही हैं। साथ ही CCTV फुटेज के जरिए डॉक्टरों की आवाजाही की भी जांच की जा रही है।
मेरठ के अल्फा अस्पताल पर भी शक
जांच में मेरठ के अल्फा अस्पताल का नाम भी सामने आया है, जहां 100 से ज्यादा ट्रांसप्लांट होने की आशंका है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों से इनकार किया है। पुलिस अस्पताल के स्टाफ से पूछताछ कर रही है।
पहले भी विवादों में रहा अस्पताल
अल्फा अस्पताल पहले भी विवादों में रह चुका है। नवंबर 2025 में दलाली के आरोप पर इसका लाइसेंस निलंबित किया गया था, हालांकि बाद में जांच में आरोप साबित न होने पर इसे बहाल कर दिया गया था।
