कानपुर में सामने आए किडनी रैकेट मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए-नए चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब एक सरकारी अस्पताल में काम करने वाले सिक्योरिटी गार्ड अजय की भूमिका सामने आई है, जिसने पूरे केस को नया मोड़ दे दिया है। महज 20 हजार रुपये की नौकरी करने वाला यह गार्ड कथित तौर पर किडनी ट्रांसप्लांट नेटवर्क में ‘कनेक्टर’ की भूमिका निभा रहा था।
खुद का अस्पताल चला चुका है अजय
जांच में पता चला कि अजय सिर्फ गार्ड ही नहीं, बल्कि पहले ‘स्टार हॉस्पिटल’ नाम से अपना अस्पताल भी चला चुका है, जो अब बंद हो चुका है। कम आय वाले व्यक्ति के पास अस्पताल खोलने के संसाधन कहां से आए, यह अब जांच का बड़ा विषय बन गया है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या इस अस्पताल का किडनी रैकेट से कोई सीधा संबंध था।
डोनर और मरीजों को जोड़ने का काम
पुलिस के मुताबिक अजय किडनी रैकेट के मुख्य आरोपी शिवम और अन्य लोगों को अलग-अलग अस्पतालों से जोड़ता था। वह जरूरतमंद मरीजों और डोनर्स के बीच संपर्क स्थापित कर उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने में मदद करता था। जांच एजेंसियों का मानना है कि वह इस पूरे नेटवर्क की एक अहम कड़ी था।
मेडलाइफ अस्पताल से जुड़े तार
पूछताछ में यह भी सामने आया कि अजय ने ही आरोपी शिवम की मुलाकात रोहन और नरेंद्र से कराई थी, जिन्होंने आगे चलकर ‘मेडलाइफ’ अस्पताल की स्थापना की। इसी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े अहम सुराग मिलने की बात कही जा रही है। इतना ही नहीं, व्हिसलब्लोअर आयुष को भी ऑपरेशन के बाद इसी अस्पताल में रखा गया था।
आय और संपत्ति पर उठे सवाल
पुलिस को इस बात पर भी संदेह है कि एक सिक्योरिटी गार्ड इतने बड़े स्तर पर नेटवर्क का हिस्सा कैसे बन सकता है। उसकी आय और संपत्ति के बीच भारी अंतर को देखते हुए अब उसके बैंक खातों, संपत्तियों और संपर्कों की गहन जांच की जा रही है।
जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद
फिलहाल पुलिस के पास सभी ट्रांसप्लांट मामलों की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन लगातार पूछताछ और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे हो सकते हैं और कई नए नाम सामने आ सकते हैं।
