जून 2026 का महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। इस महीने ज्येष्ठ और आषाढ़ मास के कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं। अधिक मास की परमा एकादशी, सोमवती अमावस्या, निर्जला एकादशी, वट पूर्णिमा और संत कबीर जयंती जैसे प्रमुख पर्व श्रद्धालुओं के बीच खास महत्व रखते हैं।
इसके अलावा असम के प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर में आयोजित होने वाला अंबुबाची मेला भी जून महीने में ही लगेगा, जिसमें देशभर से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। आइए जानते हैं जून 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहारों के बारे में।
11 जून को परमा एकादशी का व्रत
जून महीने की शुरुआत अधिक मास की परमा एकादशी से होगी। यह व्रत 11 जून 2026 को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अधिक मास में आने वाली इस एकादशी का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है। भगवान विष्णु की पूजा और व्रत रखने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
सोमवती अमावस्या पर होगा पितरों का तर्पण
15 जून 2026 को अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ रही है, इसलिए इसे सोमवती अमावस्या कहा जाएगा। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन पितरों के नाम से तर्पण और दान-पुण्य करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही जीवन में सुख और शांति बनी रहती है। इसी दिन पुरुषोत्तम मास का समापन भी होगा।
रंभा तृतीया और विंध्यवासिनी पूजा
17 जून को रंभा तृतीया व्रत रखा जाएगा। यह व्रत खासतौर पर महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत करती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की कामना से इसे रखती हैं। इसके बाद 20 जून को मां विंध्यवासिनी की विशेष पूजा होगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां विंध्यवासिनी देवी दुर्गा का जागृत स्वरूप मानी जाती हैं। भक्तों का विश्वास है कि उनकी पूजा करने से भय दूर होता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
22 जून से शुरू होगा अंबुबाची मेला
22 जून 2026 को दुर्गाष्टमी और धूमावती जयंती मनाई जाएगी। इस दिन मां दुर्गा की पूजा और व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। इसी दिन से असम के प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर में अंबुबाची मेले की शुरुआत होगी, जो 26 जून तक चलेगा। यह मेला मां कामाख्या के रजस्वला होने और धरती की उर्वरता का प्रतीक माना जाता है। हर साल इस मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
निर्जला एकादशी और वट पूर्णिमा का महत्व
25 जून 2026 को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इसे भीमसेनी और पांडव एकादशी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन बिना अन्न और जल के उपवास रखने से सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। इसके बाद 29 जून को वट पूर्णिमा व्रत रखा जाएगा। सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए वट वृक्ष की पूजा करती हैं। इसी दिन संत कबीर जयंती भी मनाई जाएगी। माना जाता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ही संत कबीर दास का जन्म हुआ था।
