भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जल्द ही ऐसा बड़ा कदम उठा सकते हैं, जिससे देश में विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ रुपये को भी मजबूती मिल सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बॉन्ड बाजार को अधिक आकर्षक बनाने पर विचार कर रही है।
बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल जल्द ही एक ऐसे प्रस्ताव पर चर्चा कर सकता है, जिसके तहत विदेशी निवेशकों को भारतीय बॉन्ड में निवेश करने पर मिलने वाले ब्याज पर लगने वाले कर में बड़ी राहत दी जा सकती है। इस कदम का उद्देश्य वैश्विक निवेशकों को भारतीय डेट मार्केट की ओर आकर्षित करना है।
बॉन्ड निवेश पर टैक्स में मिल सकती है बड़ी छूट
रिपोर्ट्स के अनुसार, विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय सरकारी और अन्य बॉन्ड से अर्जित ब्याज पर वर्तमान में 20 प्रतिशत तक कर लगाया जाता है। सरकार इस टैक्स को पूरी तरह समाप्त करने या इसमें उल्लेखनीय कटौती करने पर विचार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसा होता है तो भारत का टैक्स ढांचा वैश्विक बाजारों के अधिक अनुरूप हो जाएगा। इससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए भारतीय बॉन्ड में निवेश करना अधिक लाभदायक बन सकता है। हालांकि इस संबंध में वित्त मंत्रालय और आरबीआई की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
सरकारी बॉन्ड खरीद के नियमों में भी हो सकता है बदलाव
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आरबीआई विदेशी निवेशकों के लिए कुछ लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड्स में निवेश के अवसर फिर से खोल सकता है। साल 2024 में केंद्रीय बैंक ने 14 वर्ष और 30 वर्ष अवधि वाले कुछ सरकारी बॉन्ड्स को ‘फुली एक्सेसिबल रूट’ (FAR) सूची से बाहर कर दिया था। अब इस सूची का विस्तार करने की संभावना जताई जा रही है, जिससे विदेशी निवेशकों को बिना किसी निवेश सीमा के इन बॉन्ड्स में निवेश करने की सुविधा मिल सकती है।
रुपये पर दबाव कम करने की कोशिश
इस साल भारतीय मुद्रा रुपया कई चुनौतियों का सामना कर चुका है। मई में रुपया डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद से सरकार और आरबीआई लगातार ऐसे उपायों पर काम कर रहे हैं, जिनसे विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़े और रुपये को स्थिरता मिले। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, वैश्विक व्यापार तनाव और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से पूंजी निकाली है। ऐसे माहौल में निवेशकों को कर संबंधी राहत देना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
NRI निवेशकों को भी मिल सकती है सुविधा
सरकार विदेश में रहने वाले भारतीयों (NRI) और अन्य विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश की प्रक्रिया को भी आसान बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट स्कीम (PIS) के नियमों को और स्पष्ट एवं सरल बनाया जा सकता है। इससे विदेशी निवेशकों और प्रवासी भारतीयों को भारतीय कंपनियों के शेयरों में सीधे निवेश करने का बेहतर अवसर मिलेगा।
अर्थव्यवस्था और बैंकों को होगा फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार यदि विदेशी निवेशकों पर टैक्स का बोझ कम होता है तो भारतीय सरकारी बॉन्ड्स की वैश्विक मांग बढ़ सकती है। इससे बॉन्ड की कीमतों में मजबूती आएगी और यील्ड्स में गिरावट देखने को मिल सकती है। इसका फायदा उन बैंकों और वित्तीय संस्थानों को भी होगा जिनके पास बड़ी मात्रा में सरकारी प्रतिभूतियां मौजूद हैं। साथ ही विदेशी निवेश बढ़ने से रुपये को समर्थन मिलेगा और भारतीय अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त मजबूती मिल सकती है। अब निगाहें केंद्र सरकार और आरबीआई के संभावित फैसलों पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में निवेश और वित्तीय बाजारों की दिशा तय कर सकते हैं।
