भारतीय रसोई में रोटी, चावल और पराठे सिर्फ खाने की चीजें नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा हैं। देश की ज्यादातर थालियां आज भी अनाज से भरी नजर आती हैं और बचपन से लोगों को यही सिखाया जाता है कि पेट भरने वाला खाना ही सबसे अच्छा होता है। लेकिन अब एक नई सरकारी स्टडी ने इस सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद यानी ICMR की गाइडलाइन पर आधारित एक रिपोर्ट में सामने आया है कि देश के अधिकांश लोग जरूरत से ज्यादा अनाज खा रहे हैं, जबकि शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन, दाल, सब्जियां, फल और दूध जैसी चीजें बेहद कम मात्रा में ले रहे हैं। यह अध्ययन 2022-23 के घरेलू उपभोग सर्वे के आंकड़ों पर तैयार किया गया है।
कई राज्यों में तय सीमा से ज्यादा अनाज
रिपोर्ट के मुताबिक, एक व्यक्ति को महीने में करीब 7.5 किलो अनाज की जरूरत होती है, लेकिन कई राज्यों में लोग 10 से 11 किलो तक गेहूं और चावल का सेवन कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में इसकी मात्रा सबसे ज्यादा पाई गई है। पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और त्रिपुरा जैसे राज्यों में अनाज की खपत सबसे अधिक दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ, शरीर को जरूरी पोषण देने वाली सब्जियों और दालों की मात्रा बेहद कम देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि भागदौड़ भरी जिंदगी और आसान भोजन की आदत ने इस स्थिति को और बढ़ा दिया है। सुबह जल्दी ऑफिस जाना हो या बच्चों को स्कूल भेजना, ऐसे में ज्यादातर परिवार रोटी-चावल को सबसे आसान और जल्दी बनने वाला विकल्प मानते हैं।
फास्ट फूड बढ़ा रहा खतरा
आजकल बाहर का प्रोसेस्ड फूड, फास्ट फूड और रेस्तरां में खाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इसका असर लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिलने के कारण मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ पेट भरना अच्छी सेहत की निशानी नहीं है। अगर खाने में सही पोषण नहीं होगा तो शरीर धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। यही वजह है कि कम उम्र में भी लोग थकान, कमजोरी और कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
थाली से गायब हो रहा प्रोटीन
रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंता दाल और प्रोटीन की कमी को लेकर जताई गई है। ICMR के अनुसार, हर व्यक्ति को महीने में लगभग 12 किलो सब्जियां खानी चाहिए, लेकिन सबसे ज्यादा सब्जियां खाने वाले राज्य छत्तीसगढ़ में भी ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा सिर्फ 6.7 किलो और शहरी क्षेत्रों में 8.3 किलो तक ही पहुंच पाया। इसी तरह, शाकाहारी लोगों को हर महीने करीब 2.6 किलो दाल खाने की सलाह दी गई है, जबकि मांसाहारी लोगों के लिए 1.7 किलो दाल जरूरी मानी गई है। लेकिन देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लोग महीने में 1 किलो से भी कम दाल खा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, दाल प्रोटीन का सबसे बड़ा स्रोत है और इसकी कमी से शरीर में कमजोरी, थकान और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
बैलेंस डाइट अपनाना जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी सेहत के लिए थाली में संतुलन बेहद जरूरी है। सिर्फ अनाज पर निर्भर रहने की बजाय दाल, हरी सब्जियां, मौसमी फल, दूध और प्रोटीन से भरपूर चीजों को भी भोजन में शामिल करना चाहिए। रोज सलाद खाना, जंक फूड कम करना और दाल-सब्जियों की मात्रा बढ़ाना जैसी छोटी आदतें लंबे समय में बड़ी बीमारियों से बचाने में मदद कर सकती हैं। आखिरकार, स्वस्थ शरीर ही खुशहाल जिंदगी की सबसे बड़ी पूंजी है।
