सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, रिकॉर्ड हाई से हजारों नीचे पहुंचे दाम

सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, रिकॉर्ड हाई से हजारों नीचे पहुंचे दाम

कमोडिटी बाजार में शुक्रवार को सोना और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 10 ग्राम सोना करीब 1700 रुपये टूटकर 151700 रुपये पर पहुंच गया। वहीं चांदी की कीमतों में 4000 रुपये से ज्यादा की गिरावट आई और यह 2,39,685 रुपये प्रति किलो पर कारोबार करती दिखी। सोने में करीब 1.10 प्रतिशत और चांदी में 1.70 प्रतिशत की गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है।

ग्लोबल मार्केट का भी असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी के दाम कमजोर पड़े हैं। कॉमेक्स डेटा के अनुसार सोना करीब 4802 डॉलर प्रति औंस और चांदी 75.46 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रही है। वैश्विक स्तर पर दबाव और अनिश्चितता के कारण भारतीय बाजार में भी इन धातुओं की कीमतों पर असर साफ दिखाई दे रहा है।

गिरावट की बड़ी वजह क्या है?
दरअसल इस समय बाजार की नजर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता पर टिकी हुई है। निवेशकों को यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों देशों के बीच समझौता होगा या नहीं। इसी अनिश्चितता के चलते बाजार में मुनाफावसूली बढ़ गई है। हाल के दिनों में आई तेजी के बाद निवेशक अब बिकवाली कर रहे हैं, जिससे सोना और चांदी के दाम नीचे आ गए हैं।

रिकॉर्ड हाई से कितना सस्ता हुआ?
अगर रिकॉर्ड स्तर की बात करें तो चांदी अपने उच्चतम स्तर 4.39 लाख रुपये प्रति किलो से गिरकर अब करीब 2.39 लाख रुपये पर आ गई है। यानी इसमें करीब 2 लाख रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं सोना भी अपने रिकॉर्ड हाई 2.02 लाख रुपये से टूटकर अब 1.51 लाख रुपये पर पहुंच गया है, जो करीब 49 हजार रुपये की गिरावट को दर्शाता है।

निवेशकों के लिए क्या सलाह?
बाजार के जानकारों का मानना है कि मौजूदा समय में निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। उनका कहना है कि गिरावट के दौरान खरीदारी का मौका मिल सकता है, लेकिन निवेश का नजरिया लंबी अवधि का होना चाहिए। छोटी अवधि के लिए जल्दबाजी में निवेश करने से बचने की सलाह दी जा रही है।

आगे क्या रह सकता है रुख?
आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान वार्ता का नतीजा बाजार की दिशा तय करेगा। अगर स्थिति स्पष्ट होती है तो सोने-चांदी में स्थिरता आ सकती है, लेकिन अनिश्चितता बनी रहने पर उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। फिलहाल निवेशकों की नजर इसी बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

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