दुनिया भर में सोना सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं, बल्कि देशों की आर्थिक मजबूती का अहम पैमाना भी है। 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कई देशों ने अपने गोल्ड रिजर्व में तेजी से इजाफा किया है। यही वजह है कि अब सोना निवेश के साथ-साथ रणनीतिक सुरक्षा का भी बड़ा जरिया बन चुका है।
अमेरिका टॉप पर, यूरोप के देश पीछे-पीछे
सबसे ज्यादा सोना United States के पास है, जिसके भंडार में करीब 8,133 टन सोना मौजूद है। इसके बाद जर्मनी (Germany) (लगभग 3,350 टन), इटली (Italy) (2,452 टन) और फ्रांस (France) (करीब 2,437 टन) का स्थान है। रूस (Russia) करीब 2,330 टन सोने के साथ पांचवें नंबर पर बना हुआ है।
चीन तेजी से बढ़ा रहा भंडार
चीन (China) भले ही अभी टॉप-5 में नहीं है, लेकिन उसकी खरीदारी लगातार जारी है। चीन के पास फिलहाल करीब 2,313.5 टन सोना है और वह पिछले 17 महीनों से लगातार अपने भंडार में इजाफा कर रहा है। अगर यही रफ्तार रही, तो वह जल्द ही शीर्ष देशों में शामिल हो सकता है।
भारत भी मजबूत कर रहा गोल्ड रिजर्व
भारत (India) का स्वर्ण भंडार भी 2026 में बढ़कर करीब 880 टन तक पहुंच गया है।भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार सोना खरीदकर अपने विदेशी मुद्रा भंडार को विविध बना रहा है। फरवरी 2026 में ही भारत ने लगभग 18 टन सोना खरीदा। इसका मकसद डॉलर पर निर्भरता कम करना और आर्थिक स्थिरता बढ़ाना है।
पाकिस्तान-बांग्लादेश काफी पीछे
दूसरी ओर पाकिस्तान (Pakistan) के पास सिर्फ 64.77 टन और बांग्लादेश (Bangladesh) के पास करीब 14.28 टन सोना है, जो भारत के मुकाबले बेहद कम है। यह दोनों देशों की सीमित आर्थिक क्षमता को भी दर्शाता है।
पोलैंड बना सबसे बड़ा खरीदार
2026 की शुरुआत में सोना खरीदने की दौड़ में Poland सबसे आगे रहा है। फरवरी में पोलैंड के केंद्रीय बैंक ने करीब 20 टन सोना खरीदा। इसके अलावा उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) और कजाकिस्तान (Kazakhstan) ने भी हाल के महीनों में करीब 8-8 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा है। इससे साफ है कि वैश्विक स्तर पर सोना फिर से आर्थिक सुरक्षा का बड़ा हथियार बन रहा है।
