ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद का मशहूर कांच उद्योग इस समय मुश्किल दौर से गुजर रहा है। समुद्री रास्तों पर बढ़ते खतरे की वजह से विदेशों में जाने वाला माल अटक गया है। कारोबारियों का कहना है कि बड़ी मात्रा में तैयार सामान समय पर विदेश नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे उद्योग को भारी नुकसान होने की आशंका है।
करोड़ों रुपये का माल विदेशों में फंसा
कांच और चूड़ियों के निर्यात से जुड़े व्यापारियों के मुताबिक लगभग 500 करोड़ रुपये का माल विदेशों में फंसा हुआ है। कई ऑर्डर भेजे तो जा चुके हैं, लेकिन जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वे अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पा रहे। इससे भुगतान भी अटक गया है और कारोबारी आर्थिक दबाव में आ गए हैं। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो नुकसान और बढ़ सकता है।
दुनिया के कई देशों तक जाता है सामान
फिरोजाबाद का कांच उद्योग अपनी खूबसूरत डिजाइन और बारीक कारीगरी के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां बनने वाली चूड़ियां और कांच के सामान करीब 150 देशों तक भेजे जाते हैं। यूरोप और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में भी इनकी अच्छी मांग रहती है। लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण समुद्री रास्तों पर असर पड़ा है, जिससे निर्यात की गति धीमी पड़ गई है।
समुद्री रास्ते प्रभावित होने से बढ़ी परेशानी
व्यापारियों का कहना है कि कई जहाज समय पर नहीं चल पा रहे हैं और कुछ रास्तों पर सुरक्षा कारणों से देरी हो रही है। इसकी वजह से माल की डिलीवरी तय समय पर नहीं हो पा रही। इससे ऑर्डर लेने वाले व्यापारी भी परेशान हैं। कई कंपनियों का पैसा फंस गया है और नए ऑर्डर लेने में भी सावधानी बरती जा रही है।
गैस की कीमत और लागत ने बढ़ाई चिंता
कांच उद्योग पहले से ही बढ़ती लागत और गैस की कीमतों की समस्या से जूझ रहा था। उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में भी कमी बताई जा रही है। इससे उत्पादन खर्च बढ़ गया है और छोटी इकाइयों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है। ऐसे में निर्यात रुकने से उद्योग की स्थिति और मुश्किल हो सकती है।
रोजगार पर भी मंडराने लगा खतरा
फिरोजाबाद का कांच उद्योग लाखों कारीगरों और मजदूरों की रोजी-रोटी से जुड़ा हुआ है। अगर निर्यात लंबे समय तक प्रभावित रहा तो कई इकाइयों में काम धीमा पड़ सकता है। उद्योग से जुड़े लोगों ने सरकार से मदद की मांग की है। उनका कहना है कि गैस की कीमतों में राहत और निर्यात व्यवस्था को आसान बनाने के लिए कदम उठाए जाएं, ताकि इस ऐतिहासिक उद्योग को संकट से बचाया जा सके।
