24 नवंबर को भारतीय सिनेमा ने अपना एक अनमोल सितारा खो दिया। बॉलीवुड के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र 89 वर्ष की आयु में इस दुनिया से रुख़सत हो गए। दमदार कद-काठी, दिल छू लेने वाली मुस्कान और ज़मीन से जुड़ा व्यवहार इन्हीं खूबियों ने धर्मेंद्र को करोड़ों लोगों का चहेता बनाया। 300 से अधिक फिल्मों में अपने अभिनय का जादू बिखेरकर उन्होंने हिंदी सिनेमा में ऐसा अध्याय लिखा, जिसे भुला पाना मुश्किल है।
‘किसान का बेटा, मिट्टी मेरी पहचान’
स्टारडम होने के बाद भी वह कभी अपनी जड़ों से दूर नहीं हुए। वह हमेशा कहा करते थे कि मैं किसान का बेटा हूं, सादगी मेरी ताकत है। मैं शहर का नहीं, मिट्टी का इंसान हूं। उनकी सादगी का सबसे बड़ा सबूत था सुपरस्टार बनने के बाद भी विनम्र और ग्राउंडेड रहना। शोहरत को उन्होंने कभी ताकत नहीं माना। वह कहते थे कि मैं आज भी सीख रहा हूं। उन्हें अपने पर कोई गुमान नहीं थी।
कुछ समय पहले उनके निधन की झूठी खबरें उड़ी थीं, इसलिए 24 नवंबर की सुबह जब असली खबर सामने आई, तो लोगों को यक़ीन ही नहीं हुआ पर इस बार यह सच था। धीरे-धीरे मुंबई में शोक की लहर फैल गई। अंतिम संस्कार की तैयारियां चुपचाप होने लगीं और देखते ही देखते सिनेमा जगत का यह चमकता सितारा पंचतत्व में विलीन हो गया। लाखों फैंस अंतिम दर्शन की इच्छा मन में ही लिए रह गए।
एक ऐसा सफर, जो प्रेरणा बन गया
8 दिसंबर 1935 को पंजाब के नसराली गांव में जन्में धर्मेंद्र ने 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाले धर्मेंद्र उम्र के आखिरी वक्त तक सक्रिय रहे। रुपहले पर्दे पर उन्होंने अलग-अलग किरदार निभाए। एक्शन, रोमांस, हो या फिर कॉमेडी… हर रोल में वो फिट नजर आए। निजी जिंदगी को लेकर भी वह काफी चर्चा में रहे। 2012 में पद्मभूषण से सम्मानित धर्मेंद्र ने सात-आठ दशकों तक लोगों के दिलों पर राज किया। उन्होंने जिस किरदार को छुआ, वह जीवंत हो उठा।
निजी ज़िंदगी भी रही चर्चा में
धर्मेंद्र ने अपने जीवन में दो शादियां की पहली प्रकाश कौर से, और दूसरी ‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी से। छह बच्चों के पिता धर्मेंद्र ने हमेशा परिवार को महत्व दिया और अपने रिश्तों को संजोकर रखा। अंत में धर्मेंद्र यूँ ही चुपके से चले गए। आज देश का हर दिल उन्हें नम आंखों से याद कर रहा है।

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