उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने लखनऊ में अस्पतालों में बढ़ती भीड़ को गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) में रोजाना 12 से 14 हजार मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं, जबकि SGPGI में यह संख्या 10 से 11 हजार के बीच है। इतने बड़े पैमाने पर मरीजों के आने से डॉक्टरों पर भारी दबाव पड़ता है और इलाज की गुणवत्ता बनाए रखना चुनौती बन जाता है।
सीएम योगी ने बदलती जीवनशैली को बीमारियों की बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि रोज 4 से 6 घंटे स्मार्टफोन इस्तेमाल करना भी एक तरह की ‘नई बीमारी’ है। इसके साथ ही डायबिटीज और हार्ट डिजीज के तेजी से बढ़ते मामलों पर भी चिंता जताई। उन्होंने लोगों को समय से सोने-जागने और देर रात तक मोबाइल से दूरी बनाने की सलाह दी। उनका कहना था कि मेहनतकश लोगों में दिल की बीमारियां अपेक्षाकृत कम होती हैं, क्योंकि उनका शरीर सक्रिय रहता है।
स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े बदलाव का दावा
मुख्यमंत्री ने पिछले 9 वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए सुधारों को भी गिनाया। उन्होंने बताया कि यूपी में पहले केवल 17 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 81 हो गए हैं। टेलीमेडिसिन और टेली-ICU जैसी सुविधाएं भी शुरू की गई हैं, जिससे दूर-दराज के मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके। साथ ही, मुख्यमंत्री राहत कोष से वर्ष 2025 में 1400 करोड़ रुपये इलाज के लिए दिए गए। आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के जरिए भी लाखों लोगों को आर्थिक मदद मिल रही है।
खानपान और जागरूकता पर सख्त संदेश
सीएम योगी ने मिलावटी खाद्य पदार्थों पर भी सख्ती की बात कही। उन्होंने बताया कि त्योहारों के दौरान छापेमारी में हजारों किलो मिलावटी खोवा नष्ट किया गया। उन्होंने शादियों और आयोजनों में खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी। उनका जोर इस बात पर रहा कि बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि ‘बीमारू भारत’ के साथ ‘सशक्त भारत’ का सपना संभव नहीं है, इसलिए हर व्यक्ति को अपनी सेहत के प्रति जिम्मेदार बनना होगा।
