CBSE की ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया है। साथ ही OSM सेवा से जुड़े टेंडर और खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब बोर्ड की नई मूल्यांकन प्रणाली को लेकर छात्रों और अभिभावकों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। शिक्षा मंत्रालय भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।
संसद की स्थायी समिति के सामने पेश हुआ छात्र
OSM प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को उजागर करने वाले 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत मंगलवार को संसद की स्थायी समिति के समक्ष पेश हुए। यह पहली बार माना जा रहा है जब किसी छात्र को सीधे संसदीय समिति के सामने अपनी बात रखने का अवसर मिला। सार्थक ने समिति के समक्ष OSM प्रणाली और उससे जुड़े टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने दावा किया कि उनके अध्ययन और शोध के अनुसार इस प्रणाली में कम से कम 15 गंभीर खामियां मौजूद हैं। उनके खुलासे के बाद शिक्षा मंत्रालय ने CBSE से संबंधित टेंडर प्रक्रिया पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने बताया कि छात्र द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और CBSE के जवाबों का अध्ययन करने के बाद आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
रिजल्ट के बाद शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, CBSE ने 13 मई को 12वीं कक्षा का परिणाम घोषित किया था। इस बार पहली बार उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली के जरिए किया गया था। परिणाम जारी होने के बाद कई छात्रों ने प्राप्त अंकों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई। इन शिकायतों के बाद मूल्यांकन प्रक्रिया और तकनीकी व्यवस्था की जांच शुरू हुई। कई छात्रों ने दावा किया कि उनके प्राप्तांक अपेक्षा से काफी अलग थे, जिससे OSM प्रणाली पर सवाल खड़े हुए।
साइबर अटैक के बावजूद चलता रहा पोर्टल
इसी बीच CBSE के री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर हमले की भी कोशिश की गई। बोर्ड के अनुसार, महज दो मिनट के भीतर करीब 15 लाख एक्सेस प्रयास किए गए। इसके अलावा एक लाख से अधिक बार सिस्टम की फाइलों तक अनधिकृत पहुंच बनाने की कोशिश हुई। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था के चलते पोर्टल प्रभावित नहीं हुआ और निर्धारित तरीके से कार्य करता रहा। दोपहर तीन बजे तक 16 हजार से अधिक छात्र पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर चुके थे।
दो छात्रों ने उजागर कीं गड़बड़ियां
दिल्ली के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने फिजिक्स विषय में मिले अंकों पर सवाल उठाया था। पुनर्मूल्यांकन के दौरान उत्तर पुस्तिका की जांच में त्रुटियां सामने आईं। शुरुआती दौर में उन्हें सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा, लेकिन बाद में CBSE ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए उनसे माफी मांगी। वहीं रांची के 17 वर्षीय छात्र और टेक रिसर्चर सार्थक सिद्धांत ने CBSE के सैकड़ों दस्तावेजों का अध्ययन कर OSM टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया। उनके खुलासे के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। अब सरकार, शिक्षा मंत्रालय और संसदीय समिति की निगाहें इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे OSM प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
