गोरखपुर में पकड़ा गया फर्जी IAS गौरव कुमार सिंह उर्फ ललित किशोर किसी फिल्मी किरदार से कम नहीं निकला। साधारण परिवार का यह युवक जब सिविल सेवा में सफल नहीं हो पाया, तो उसने गलत रास्ता चुनते हुए IAS बनने का पूरा खेल रच दिया। गाड़ियों का काफिला, लाल-नीली बत्ती, बड़ी-बड़ी मीटिंगें और VIP प्रोटोकॉल सब कुछ असली अफसर की तरह। उसकी पहचान इतनी मजबूत बन गई कि लोग उसे देखकर ही भरोसा कर लेते थे। लेकिन इस दिखावे के पीछे करोड़ों की ठगी और बड़ा नेटवर्क छिपा था, जिसकी किसी को भनक तक नहीं थी।
नौकरी से ठगी तक, कैसे बढ़ी अपराध की राह
ललित ने पढ़ाई में हमेशा अच्छा किया था और 2019 में MSc करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। कोचिंग भी खोली, लेकिन 2022 में पहली बार नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लेने की गलती ने सब बदल दिया। गिरफ्तारी हुई, सपने टूटे और तब ही उसने ठगी को ‘करियर’ बना लिया। वह एक साल अंडरग्राउंड रहा और इसी दौरान शादी भी कर ली। खर्च बढ़ा तो उसने अपने सॉफ्टवेयर इंजीनियर साले अभिषेक को शामिल किया और दोनों ने फर्जी IAS का पूरा सेट-अप तैयार किया AI से बने टेंडर पेपर, नकली ID, नेम प्लेट, सरकारी फाइलें, सुरक्षा जैसा स्टाफ और बड़ी-बड़ी डील्स। इसी सेटअप से उसने करोड़ों रुपये ऐंठना शुरू किया।
असली SDM को थप्पड़, चार गर्लफ्रेंड और तीन प्रेग्नेंट
फर्जी IAS इतना बेलगाम हो गया था कि बिहार के एक गांव में दौरे के दौरान असली SDM को बैज पूछने पर थप्पड़ मार बैठा और किसी शिकायत तक नहीं हुई। सोशल मीडिया पर बनाई IAS प्रोफाइल के जरिए उसने चार गर्लफ्रेंड बनाई, जिनमें से तीन प्रेग्नेंट मिलीं। लड़कियों को यह भी पता नहीं था कि वह शादीशुदा है। उसके साथ हमेशा 10-15 लोगों की टीम रहती थी, जिससे उसका ‘भौकाल’ बढ़ जाता था। उसने बड़े बिल्डरों को सरकारी ठेका दिलाने का लालच देकर 5 करोड़ रुपये और दो इनोवा कारें तक हड़प लीं। AI से तैयार फर्जी दस्तावेज उसका सबसे बड़ा हथियार थे।
99 लाख कैश से खुला फर्जी IAS का राज
यह पूरा मामला तब खुला जब बिहार चुनाव के दौरान गोरखपुर जीआरपी ने 99 लाख रुपये पकड़े और पूछताछ में पता चला कि यह पैसा गोरखपुर के एक IAS के लिए भेजा जा रहा है। मामला संदिग्ध लगा और पुलिस ने सर्विलांस पर जांच शुरू की। जल्द ही खुलासा हुआ कि यह युवक असली IAS नहीं बल्कि चार राज्यों में फैला पूरा ठगी नेटवर्क चलाने वाला मास्टरमाइंड है। पुलिस ने मोबाइल, चैट, बैंक रिकॉर्ड और फर्जी दस्तावेज जब्त किए तो करोड़ों की ठगी सामने आई। गोरखपुर पुलिस का कहना है कि अभी कई और बड़े खुलासे होने बाकी हैं और जांच बिहार, झारखंड व एमपी पुलिस के साथ मिलकर जारी है।
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