उत्तर प्रदेश में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं पर छतरी लगाने के फैसले को लेकर सियासी बयानबाजी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस फैसले पर तीखा हमला बोलते हुए इसे चुनावी दिखावा बताया है।
कानपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि जिस सरकार ने पिछले 9 वर्षों में दलितों के अधिकारों और आरक्षण को कमजोर किया, वही अब आंबेडकर की प्रतिमाओं पर छतरी लगाने की बात कर रही है। उन्होंने इसे जनता को भ्रमित करने की कोशिश बताया।
BSP से रिश्तों पर भी दिया बयान
बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन के सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा कि 2019 में दोनों दल साथ थे और आज भी उनकी पार्टी दलित समाज के हक के लिए लड़ रही है। उन्होंने कहा कि पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की लड़ाई समाजवादी पार्टी ही मजबूती से लड़ रही है।
मायावती के आरोपों पर प्रतिक्रिया
मायावती द्वारा सपा पर लगाए गए आरोपों के जवाब में अखिलेश ने कहा कि उनकी पार्टी ने ही आंबेडकर की प्रतिमाओं को आगे बढ़ाया और उनके समाज के लिए लगातार काम किया है।
कानून-व्यवस्था पर भी निशाना
अखिलेश यादव ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गरीबों को सरकारी अस्पतालों में समय पर इलाज नहीं मिल रहा है और व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है।
आरक्षण और प्रतिमा विवाद पर आरोप
सपा प्रमुख ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि उसने दलितों के अधिकारों को कमजोर किया है और अब प्रतीकात्मक कदमों के जरिए राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदेश में आंबेडकर की प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं में भी बीजेपी से जुड़े लोगों की भूमिका रही है।
कुल मिलाकर, आंबेडकर प्रतिमाओं पर छतरी लगाने का मुद्दा अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा विवाद बनता जा रहा है, जिस पर आने वाले समय में और सियासी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।
