हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को ऐसा पावन दिन माना जाता है, जिसका फल कभी खत्म नहीं होता। इस वर्ष यह पर्व 19 अप्रैल 2026, सोमवार को मनाया जाएगा। आमतौर पर लोग इस दिन सोना-चांदी खरीदना शुभ मानते हैं, लेकिन वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj) का मानना है कि भौतिक वस्तुएं नश्वर हैं, असली महत्व आध्यात्मिक साधना का है।
सबसे बड़ा दान क्या है?
सत्संग में महाराज जी ने बताया कि अक्षय तृतीया पर अन्न, जल या धन का दान तो आम है, लेकिन सबसे श्रेष्ठ “नामजप का दान” है। उनके अनुसार, जब कोई व्यक्ति “राधा-राधा” या भगवान का नाम जपता है और वह ध्वनि किसी दुखी व्यक्ति तक पहुंचती है, तो उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकता है। यही सच्चा और सबसे बड़ा दान माना गया है।
तीन उपाय जो बदल सकते हैं जीवन
महाराज जी ने इस दिन के लिए तीन खास उपाय बताए-
1- मौन का सहारा लें
अनावश्यक बातचीत और विवाद से दूर रहकर मौन धारण करें, ताकि मन की ऊर्जा भक्ति में लग सके।
2- बाहर के जल और भोजन का त्याग
बाहर के भोजन और पानी से बचें और घर में भगवान को भोग लगाकर ही प्रसाद ग्रहण करें, इससे मन और बुद्धि शुद्ध रहती है।
3- नामजप की निरंतरता
पूरे दिन जितना संभव हो, भगवान के नाम का जप करें, क्योंकि इस दिन किया गया जाप कई गुना फल देता है।
सोना न खरीद सकें तो क्या करें?
महाराज जी के अनुसार, यदि कोई सोना या चांदी नहीं खरीद सकता, तो निराश होने की जरूरत नहीं है। इस दिन जौ खरीदना या दान करना भी उतना ही पुण्यदायक माना जाता है। साथ ही, मिट्टी के घड़े में पानी भरकर प्यासे लोगों को पिलाना भी अक्षय पुण्य दिलाता है। इस तरह सच्ची श्रद्धा और सेवा से ही इस पर्व का वास्तविक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
