आज के डिजिटल दौर में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी के अधिक इस्तेमाल से कम उम्र में ही आंखों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। खासकर ड्राई आई एक आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या बन गई है, जिसमें आंखों में नमी की कमी, जलन और लालपन महसूस होता है।
AIIMS में किए गए एक क्लीनिकल ट्रायल में ड्राई आई के इलाज के लिए लैक्टोफेरिन आधारित दवा के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। वैज्ञानिक अब इस दवा को बाजार में लाने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे मरीजों को लंबे समय तक राहत मिल सकती है।
कोलोस्ट्रम से तैयार हुई दवा
यह दवा गाय के कोलोस्ट्रम (पहला दूध) से प्राप्त लैक्टोफेरिन प्रोटीन से बनाई गई है। कोलोस्ट्रम पोषक तत्वों और बायोएक्टिव कंपाउंड्स से भरपूर होता है, जो शरीर की मरम्मत और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। इस प्रोजेक्ट में एक जापानी कंपनी के साथ मिलकर रिसर्च किया गया है।
ट्रायल में दिखा स्पष्ट सुधार
करीब 200 मरीजों पर किए गए तीन महीने के ट्रायल में रोजाना 250 mg लैक्टोफेरिन दिया गया। डॉ. नम्रता शर्मा के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन में पाया गया कि मरीजों की आंखों में आंसू बनने की क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ।
मौजूदा इलाज से बेहतर विकल्प
अभी ड्राई आई के इलाज में आई ड्रॉप्स या स्टेरॉयड का इस्तेमाल होता है, जो केवल अस्थायी राहत देते हैं और साइड इफेक्ट्स का जोखिम भी रहता है। इसके मुकाबले यह नई थेरेपी सुरक्षित, असरदार और किफायती विकल्प के रूप में सामने आ रही है।
क्या है लैक्टोफेरिन?
लैक्टोफेरिन एक प्राकृतिक प्रोटीन है, जो शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने, सूजन कम करने और कोशिकाओं की मरम्मत में मदद करता है। वैज्ञानिक इसके अन्य उपयोगों, जैसे एनीमिया के इलाज में भी संभावनाएं तलाश रहे हैं।
जल्द बाजार में आ सकती है दवा
रिसर्च अभी समीक्षा के चरण में है, लेकिन मंजूरी मिलने के बाद यह दवा बाजार में उपलब्ध हो सकती है। इससे लाखों लोगों को ड्राई आई की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
