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जेएमडी डेस्क: लंकापति… लंकेश… दशानन… ब्रह्म ज्ञानी नेक नियत शिव भक्त… जो बहन के लिए भगवान से लड़ गया…जिसने सीता को पवित्र लौटाया…जो राक्षस होकर भी विद्वान कहलाया… उसका कोई वंशज क्या किसी को नज़र न आया…??

इससे पहले रावण के बारे में थोड़ी बात कर लेते हैं… दरअसल लंकापति रावण की कई पत्नियां थीं… लेकिन पवित्र रामायण में रावण की दो प्रमुख पत्नियों और छ: पुत्रों के बारे में बताया गया है… लंकापति की पत्नी मंदोदरी मायासुर और हेमा की बड़ी पुत्री थी… इनके भाई थे मायावी और दुदुम्भी, जिनका वध वानरराज बाली ने किया था… मंदोदरी से रावण को दो पुत्रों को प्राप्ति हुई… मेघनाद और अक्षयकुमार.
मेघनाद… रावण का बड़ा पुत्र था… महान योद्धा… पुराणों में वर्णित एकमात्र महारथी जिसके पास तीनों महास्त्र- ब्रह्मास्त्र, नारायणास्त्र एवं पाशुपतास्त्र थे… मेघनाद भगवान शिव को बहुत प्रिय था… जिसने देवता इंद्र को भी पराजित किया था… लंका के धर्मयुद्ध के दौरान भगवान राम और लक्ष्मण को नागपाश में बांध दिया था… अंत में लक्ष्मण जी ने मेघनाद का वध किया…
अब बात करते हैं अक्षयकुमार की… जो लंकापति का सबसे छोटा पुत्र था… ये पराक्रमी होने के साथ-साथ कई दिव्यास्त्रों का ज्ञाता भी था… लेकिन जब वो 16 वर्ष का था, तो हनुमान जी ने अशोक वाटिका उजाड़ दी थी और कई राक्षसों का वध कर दिया, उसके बाद अक्षयकुमार हनुमान जी से युद्ध करने गया और मारा गया…
रावण की दूसरी पत्नी का नाम  दम्यमालिनी था…जो मायासुर और हेमा की दूसरी पुत्री थी… यानी मंदोदरी की छोटी बहन थी… इनसे रावण को 4 प्रतापी पुत्रों की प्राप्ति हुई…अतिकाय, नरान्तक, देवान्तक और त्रिसिरा.
अतिकाय रावण का दूसरा पुत्र होने के साथ ही महान योद्धा भी था… एक बार कैलाश पर्वत पर उत्पात मचाने की वजह से भगवान शिव ने उस पर त्रिशूल से प्रहार किया… अतिकाय ने त्रिशूल को बीच में पकड़ लिया और नम्रता पूर्वक भगवान शिव को प्रणाम किया… तब महादेव ने प्रसन्न होकर उसे कई दिव्यास्त्र दिए… भगवान शंकर के वरदान के कारण अतिकाय का वध केवल ब्रह्मास्त्र से ही किया जा सकता था… लंका युद्ध के दौरान लक्ष्मण जी ने ब्रह्मास्त्र से उसका वध किया…
नरान्तक रावण का तीसरा पुत्र था… रामायण के अनुसार इसके अधीन लंका की 72 करोड़ राक्षसों की सेना थी… नरान्तक युद्ध में अतिकाय के साथ लड़ने आया था… युद्ध के दौरान हनुमान जी के हाथों मारा गया…
देवान्तक लंकापति का चौथा पुत्र था… महान योद्धा होने के साथ ही वो रावण की सेना का सेनापति भी था… इसने स्वर्ग के कई देवताओं को भी हराया था… देवान्तक का वध अंगद ने किया था… देवान्तक का ही पुत्र था… महाकंटक… जो लंका युद्ध के बाद राक्षसों की सेना में अकेला जीवित बचा था, जिसे प्रभु श्री राम ने जीवन दान दिया था… उसके बाद वो लंका में नही रुका.
त्रिसिरा दशानन का पांचवां पुत्र था… लंकापति के बाद त्रिसिरा ही एक ऐसा योद्धा था जिसके एक से ज्यादा सिर थे… त्रिसिरा  तीन सिर वाला पराक्रमी योद्धा था… लंका युद्ध के दौरान इसने अपने बाणों से हनुमान जी को बींध डाला था, तब क्रोधित होकर हनुमान जी ने युद्ध में इसका वध कर दिया था… कुछ लोग प्रहस्त को भी रावण का पुत्र बताते हैं, जो सत्य नहीं माना जाता. कहते हैं कि प्रहस्त सुमाली का पुत्र और रावण का मामा था। उसका पुत्र जंबुवाली रावण का छोटा भाई था। प्रहस्त रावण की सेना का प्रधान सेनापति था। लंका युद्ध के दौरान नील ने उसका वध किया था…
रावण का प्रपौत्र महाकंटक ही एक अकेला राक्षस था, जो लंका युद्ध में जीवित बचा था. वो इसलिए, क्योंकि उसे भगवान राम से क्षमादान मिला था… उस नए जीवन को उसने एक ब्राह्मण के रूप में जीने का निर्णय लिया और कान्यकुब्ज में जाकर ब्राह्मण का जीवन व्यतीत करने लगा… उसी से कान्यकुब्ज ब्राह्मणों की शाखा चली, जो पुलत्स्य गोत्र में आती है… आज के कान्यकुब्ज ब्राह्मण उसी के वंशज है… जो आज भी आपके आस-पास मौजूद हैं… ये कान्यकुब्ज ब्राह्मण रावण की वंशावली के माने जाते हैं… जिनका गौत्र रावण के बाबा पुलस्त्य के नाम पर है…  जो आपके आस-पास ही सामान्य जीवन जी रहे हैं…

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